Thursday, May 24, 2012


ना
जाने कौन सी बात आखरी हो जाए
ना जाने कौन सी रात आखरी हो जाए
हाल चाल पूछते रहा करो दोस्त
ना जाने कौन सी सांस आखरी हो जाए


जब जब मेरे ख्यालों मैं,
तेरा चेहरा ऊबर आयेगा
,
नीद हमको आयेगी
,
चैन तुमको बी आयेगा
,
यह हश्र तो होगा हमारा
,
हर रात हमारी जिन्दगी में
,
करार हमको आये तो
,
करार तुमको बी आयेगा
,


नैनो मे बसे है ज़रा याद रखना
,
अगर काम पड़े तो याद करना
,
मुझे तो आदत है आपको याद करने की
,
अगर हिचकी आए तो माफ़ करना
.......

ये दुनिया वाले भी बड़े अजीब होते है

कभी दूर तो कभी क़रीब होते है
दर्द ना बताओ तो हमे कायर कहते है
और दर्द बताओ तो हमे शायर कहते है .......


एक मुलाक़ात करो हमसे इनायत समझकर
,
हर चीज़ का हिसाब देंगे क़यामत समझकर
,
मेरी दोस्ती पे कभी शक ना करना
,
हम दोस्ती भी करते है इबादत समझकर
.........


ख़ामोशियों की वो धीमी सी आवाज़ है
,
तन्हाइयों मे वो एक गहरा राज़ है
,
मिलते नही है सबको ऐसे दोस्त
,

मैली ही रहेगी यमुना

यमुनानगर में पश्चिमी यमुना नहर की दुर्गति देखकर हरियाणा विधानसभा की पब्लिक एकाउंट्स कमेटी यानी पीएसी के सदस्यों की त्वरित टिप्पणी यह बताने के लिए काफी है कि नदियों की सफाई के नाम पर अब तक दिखावे के आंसू बहाए जा रहे थे। योजनाएं बनी, केंद्र से धन भी आया पर कहां गया, कोई बताने को तैयार नहीं, हां फाइलों का पेट जरूर भर दिया गया। यमुना में गंदगी बहे, जहरीले रसायनों की लहरें उठें या फिर योजनाओं के अवशेष जल बहाव का रास्ता रोकें, लगता है अभी किसी को कोई चिंता नहीं। कितना कड़वा सत्य है कि पश्चिमी यमुना नहर को अधिकारी डंपिंग स्टेशन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में सोनीपत से पानीपत तक यमुना की सफाई के लिए करोड़ों की योजना बनी थी। केंद्र तथा राज्य स्तर पर इस नदी की सफाई के लिए पिछले पांच वर्षो के दौरान कम से कम छह बार विमर्श हुआ, प्रदूषण पर दिल्ली सरकार से दो बार झड़प हुई, केंद्रीय जल बोर्ड ने निर्देश जारी किए पर इन सब का नतीजा क्या निकला? न प्रदूषण में मामूली कमी आई, न किसी योजना को अंतिम रूप दिया जा सका और न ही निकट भविष्य में किसी योजना पर प्रभावशाली क्रियान्वयन की संभावना नजर आ रही है। पीएसी के सदस्यों ने ट्विन सिटी यमुनानगर और जगाधरी में जो कुछ देखा और प्रतिक्रिया व्यक्त की उसके आलोक में राज्य सरकार को तत्काल जागते हुए एक्शन प्लान तैयार करके कम से कम अपने हिस्से की यमुना को साफ करने पर गंभीरता से जुट जाना चाहिए। रसायनयुक्त कचरा और सीवर का पानी सीधे नहर में गिराया जाना पानी को खतरनाक तो बना ही रहा है और साथ ही यमुना की पवित्रता पर भी कुठाराघात कर रहा है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा हो सकता है। विधानसभा की महत्वपूर्ण कमेटी अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को जल्द से जल्द सौंपे। इसके तथ्यों, निष्कर्षो के आधार पर वृहद योजना बनाई जाए और उस पर पूरी ईमानदारी से काम भी हो। सरकार इसमें रूचि भी ले क्योंकि उसकी अनदेखी के कारण ही यमुना खनन माफिया की पहली पसंद बन गई। भविष्य निश्चिंत रहे, इसके लिए जरूरी है वर्तमान में सतर्क और सक्रिय रहना। यमुना किनारे स्थित उद्योग इकाइयों पर विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए। कड़े आर्थिक दंड और तालाबंदी जैसे प्रावधान यमुना को और मैली होने से बचा सकते हैं।

नापाक मंसूबे

उत्तरी कश्मीर के सोपोर कस्बे में पिछले तीन दिन में सुरक्षाबलों पर हमलों की घटनाएं इस दृष्टि से चिंताजनक हैं कि इन वारदातों को अंजाम देने वाले छात्र हैं जिन्हें आतंकी अपने नापाक मंसूबों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। विगत दिवस सोपोर में सुरक्षाबलों ने एक संदिग्ध किशोर को रुकने के लिए कहा तो वह भागने लगा। जब उसका पीछा किया तो उसने पिस्तौल निकालकर जवानों पर एक के बाद एक चार गोलियां दाग दीं। भीड़ का फायदा लेते हुए वह भागने में सफल हो गया। पिछले तीन दिन में जो भी हुआ उस सबके पीछे अलगाववादियों का हाथ है जो घाटी में शांति के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं। चूंकि अमरनाथ यात्रा जून में शुरू होने जा रही है और कुछ शरारती तत्वों की यह कोशिश है कि किसी तरह घाटी में माहौल को बिगाड़कर राजनीतिक रोटियां सेंकी जाएं। बात अगर वर्ष 2010 की करें तो घाटी में एक साजिश के तहत माहौल को बिगाड़ा गया था और तब पत्थरबाज जिसमें अधिकतर किशोर शामिल थे सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द बन गए थे। सोपोर कस्बे में सुरक्षाबलों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इन वारदातें में जो भी दोषी हैं और इन के पीछे किन लोगों का हाथ है उनकी पहचान करना जरूरी है। घाटी में कई दीवारों पर भारत विरोधी नारों को हल्के से नहीं लिया जाना चाहिए। यह सब कुछ एक साजिश के तहत हो रहा है। इनके पीछे कौन लोग हैं उन्हें ढूंढ निकालना बहुत जरूरी है क्योंकि अमरनाथ यात्रा से पहले इस तरह की हरकतें लोगों की भावनाओं को भड़काने का काम करेंगी जिससे हालात बेकाबू हो सकते हैं। अलगाववादियों की कोशिश है कि किसी तरह सुरक्षाबलों को उकसाया जाए और इस मामले को एक बड़ा तूल दिया जाए। अगर हालात बिगड़ते हैं तो पर्यटकों की संख्या पर निसंदेह इसका विपरीत असर पड़ेगा। अब अमरनाथ यात्रा भी शुरू होने जा रही है और देश-विदेश से सैलानी वादी की सैर के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह स्थिति पर नजर रखे। अभिभावकों को भी चाहिए कि वह अपने किशोरों पर पूरी नजर रखें क्योंकि यह एक ऐसी उम्र होती है जब वह बातों में आकर ऐसी वारदातों को अंजाम दे देते हैं जिसके लिए उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को पछताना पड़ता है।

Sunday, May 13, 2012

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को संसद की पहली बैठक के साठ वर्ष पूरे होने के अवसर पर संसद के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए सभी सांसदों और देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने इस दौरान आए उतार-चढ़ाव की चर्चा करते हुए कहा कि हमें भविष्य में नया अध्याय लिखना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र पर विश्वास और आस्था की वजह से ही विश्व में हमारा कद ऊंचा हुआ है। मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान कहा कि उन्हें अपने 21 वर्षो से राज्यसभा का सदस्य होने पर गर्व है।
इस अवसर पर सोनिया गांधी ने कहा कि आज का लोकतंत्र आम आदमी का लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि इन साठ सालों में आम आदमी के देखे सपने सच हुए और यह संसद उसकी गवाह बनी है। उन्होंने कहा कि जनता की सबसे बड़ी ताकत यही संसद है जिसने ऐसे कानून बनाए जिनकी बदौलत आम आदमी को फायदा हुआ देश का विकास संभव हुआ।
प्रणब मुखर्जी ने संसद की आगामी चुनौतियों के बारे में बात की। इन साठ वर्षो में उन्होंने बहुत कुछ बदलते देखा। उन्होंने कहा कि अभी भारत को बहुत आगे जाना है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संसदीय लोकतंत्र की सराहना करते हुए कहा कि इसी राह पर चलते हुए भारत जल्द ही विश्व शक्ति बनेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने साठ वर्षो तक सफल लोकतंत्र बनाए रखा है जिस पर हम गर्व कर सकते हैं।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि इन 60 सालों में विपरित हालातों में भी देश में लोकतंत्र की स्थिति मजबूत हुई। मायावती ने बाबा भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए संसद की कामयाबी का श्रेय उन्हें दिया।
रविवार को शाम चार बजे राष्ट्रपति संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करेंगी। इस मौके पर पहली लोकसभा के सदस्य रिशांग कीशिंग, रेशम लाल जांगिड़ और केएस तिलक को सम्मानित किया जाएगा। मणिपुर के कीशिंग वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं।
ज्ञात हो कि लोकसभा और राज्यसभा के पहले सत्र की शुरुआत 13 मई 1952 को हुई थी और इसी मौके को यादगार बनाने के लिए इस विशेष सत्र का आयोजन किया गया है।
शाम 4.00 बजे से संसद के सेंट्रल हाल में समारोह का आयोजन होगा। राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और मीरा कुमार दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधित करेंगे। शाम को दोनों सदनों के संयुक्त सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगा।
इस मौके पर राष्ट्रपति 5 और 10 रुपये के सिक्के और 10 रुपये के विशेष डाक टिकट जारी करेंगी। साथ ही संसदीय लोकतंत्र को यादगार बनाने के लिए राष्ट्रपति कुल आठ पुस्तकों का विमोचन करेंगी। शाम को विख्यात संतूर वादक शिवकुमार शर्मा, देबू चौधरी, कर्नाटक संगीत के कलाकार महाराजा रामचंद्रन, शुभा मुद्गल और इकबाल खान अपनी प्रस्तुति पेश करेंगे। कई देशों के राजदूत भी जश्न के गवाह बनेंगे।