उत्तरी कश्मीर के सोपोर कस्बे में पिछले तीन दिन में सुरक्षाबलों पर हमलों की घटनाएं इस दृष्टि से चिंताजनक हैं कि इन वारदातों को अंजाम देने वाले छात्र हैं जिन्हें आतंकी अपने नापाक मंसूबों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। विगत दिवस सोपोर में सुरक्षाबलों ने एक संदिग्ध किशोर को रुकने के लिए कहा तो वह भागने लगा। जब उसका पीछा किया तो उसने पिस्तौल निकालकर जवानों पर एक के बाद एक चार गोलियां दाग दीं। भीड़ का फायदा लेते हुए वह भागने में सफल हो गया। पिछले तीन दिन में जो भी हुआ उस सबके पीछे अलगाववादियों का हाथ है जो घाटी में शांति के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं। चूंकि अमरनाथ यात्रा जून में शुरू होने जा रही है और कुछ शरारती तत्वों की यह कोशिश है कि किसी तरह घाटी में माहौल को बिगाड़कर राजनीतिक रोटियां सेंकी जाएं। बात अगर वर्ष 2010 की करें तो घाटी में एक साजिश के तहत माहौल को बिगाड़ा गया था और तब पत्थरबाज जिसमें अधिकतर किशोर शामिल थे सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द बन गए थे। सोपोर कस्बे में सुरक्षाबलों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इन वारदातें में जो भी दोषी हैं और इन के पीछे किन लोगों का हाथ है उनकी पहचान करना जरूरी है। घाटी में कई दीवारों पर भारत विरोधी नारों को हल्के से नहीं लिया जाना चाहिए। यह सब कुछ एक साजिश के तहत हो रहा है। इनके पीछे कौन लोग हैं उन्हें ढूंढ निकालना बहुत जरूरी है क्योंकि अमरनाथ यात्रा से पहले इस तरह की हरकतें लोगों की भावनाओं को भड़काने का काम करेंगी जिससे हालात बेकाबू हो सकते हैं। अलगाववादियों की कोशिश है कि किसी तरह सुरक्षाबलों को उकसाया जाए और इस मामले को एक बड़ा तूल दिया जाए। अगर हालात बिगड़ते हैं तो पर्यटकों की संख्या पर निसंदेह इसका विपरीत असर पड़ेगा। अब अमरनाथ यात्रा भी शुरू होने जा रही है और देश-विदेश से सैलानी वादी की सैर के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह स्थिति पर नजर रखे। अभिभावकों को भी चाहिए कि वह अपने किशोरों पर पूरी नजर रखें क्योंकि यह एक ऐसी उम्र होती है जब वह बातों में आकर ऐसी वारदातों को अंजाम दे देते हैं जिसके लिए उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को पछताना पड़ता है।
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