ब्रिटेन में प्रतिदिन होने वाली दुर्घटनाओं में से कम से कम 17 सड़क दुर्घटनाएँ ऐसी होती हैं जिनके लिए म्यूज़िक प्लेयर को जिम्मेदार माना जा सकता है. यह आँकड़ा काफी बडा है और चिंताजनक भी.
आईपोड धारी वाहन चालक और फूटपाथ पर चल रहे लोगों का ध्यान मार्ग पर चल रही गतिविधियों से हटकर संगीत की तरफ आ जाता है और इससे दुर्घटनाएँ होती हैं. मोटरिंग विशेषज्ञ मानते हैं कि नया "आई-पोड फैशन" दुर्घटनाओं को न्यौता दे रहा है. कानों में लगे इयरफोन इंसान का ध्यान बांट देते हैं. इससे दिमाग की एकाग्रता कम हो जाती है.
डेली मेल की खबर के अनुसार आज अधिक से अधिक वाहन चालक, जोगर, साइकल चालक और फूटपाथ पर चलने वाले लोग मनोरंजन के लिए कार ऑडियो डिवाइज़ या आईपोड अथवा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं. इससे वे एक वातावरण में पहुँच जाते हैं जहाँ उनकी ड्राइविंग "ऑटोपायलट" की स्थिति में आ जाती है. यही हाल फूटपाथ पर चल रहे लोगों का भी होता है, जब उन्हें पता हीं नहीं चलता कि कब वे अपने गंतव्य स्थान पर पहुँच भी गए. उनके दिमाग का "ऑटो दिशा निर्देश" सिस्टम उन्हें अपने आप गंतव्य स्थान तक ले आता है और वे संगीत में ही खोए रहते हैं.
परंतु यह ऑटो सिस्टम एकाग्र नहीं होता. इससे हमें अचानक उपस्थिति होने वाले खतरे के बारे में पता नहीं चलता और उससे बचने के लिए जरूरी एकाग्रता भी ना होने से हम आसानी से दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं.
सड़क पार करते समय तेज संगीत सुनते रहने से अचानक तेजी से आ रही कार की तरफ ध्यान केन्द्रीत नहीं हो पाता और दुर्घटना हो जाती है. ऐसा ही कुछ वाहन चालकों के साथ भी होता है.
इससे भी भयावह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब राह पर चल रहे लोग अपने मोबाइल से एसएमएस करने लगते हैं या ईमेल चैक करने लगते हैं. इससे उनका ध्यान और भी अधिक विचलित हो जाता है.
इस तरह से होने वाली दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष 5% की दर से वृद्धि हो रही
आईपोड धारी वाहन चालक और फूटपाथ पर चल रहे लोगों का ध्यान मार्ग पर चल रही गतिविधियों से हटकर संगीत की तरफ आ जाता है और इससे दुर्घटनाएँ होती हैं. मोटरिंग विशेषज्ञ मानते हैं कि नया "आई-पोड फैशन" दुर्घटनाओं को न्यौता दे रहा है. कानों में लगे इयरफोन इंसान का ध्यान बांट देते हैं. इससे दिमाग की एकाग्रता कम हो जाती है.
डेली मेल की खबर के अनुसार आज अधिक से अधिक वाहन चालक, जोगर, साइकल चालक और फूटपाथ पर चलने वाले लोग मनोरंजन के लिए कार ऑडियो डिवाइज़ या आईपोड अथवा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं. इससे वे एक वातावरण में पहुँच जाते हैं जहाँ उनकी ड्राइविंग "ऑटोपायलट" की स्थिति में आ जाती है. यही हाल फूटपाथ पर चल रहे लोगों का भी होता है, जब उन्हें पता हीं नहीं चलता कि कब वे अपने गंतव्य स्थान पर पहुँच भी गए. उनके दिमाग का "ऑटो दिशा निर्देश" सिस्टम उन्हें अपने आप गंतव्य स्थान तक ले आता है और वे संगीत में ही खोए रहते हैं.
परंतु यह ऑटो सिस्टम एकाग्र नहीं होता. इससे हमें अचानक उपस्थिति होने वाले खतरे के बारे में पता नहीं चलता और उससे बचने के लिए जरूरी एकाग्रता भी ना होने से हम आसानी से दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं.
सड़क पार करते समय तेज संगीत सुनते रहने से अचानक तेजी से आ रही कार की तरफ ध्यान केन्द्रीत नहीं हो पाता और दुर्घटना हो जाती है. ऐसा ही कुछ वाहन चालकों के साथ भी होता है.
इससे भी भयावह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब राह पर चल रहे लोग अपने मोबाइल से एसएमएस करने लगते हैं या ईमेल चैक करने लगते हैं. इससे उनका ध्यान और भी अधिक विचलित हो जाता है.
इस तरह से होने वाली दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष 5% की दर से वृद्धि हो रही
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